1.यदि ग्रह अस्त हो तो उस ग्रह से संबंधित कुछ भी दान न करें बल्कि मंत्र या रत्न धारण करें
2.किसी भी निच्च के गृह के जप - पूजा- अर्चना करनी चाहिए
3. कोई भी ग्रह को मजबूत करने के लिए उससे संबंधित चीज को ग्रहण करना
4. किसी भी ग्रह को शांत करने के लिए उस ग्रह के देवता की पूजा की जाती है
5. किसी भी ग्रह को मजबूत करने के लिए उस ग्रह का जाप करना चाहिए
6. किसी भी ग्रह कों कमजोर करना हो तो उस गृह की सिजो को अस्त व्यस्त रखे
7. किसी भी गृह के आशीर्वाद लेने के लिए उस गृह की सिको को दान करे (अस्त नहीं होना चाहिए)
8. कमजोर भावने बल देने के लिए उस भाव के भावेश का नंग धारण करना चाहिए
ग्रह | नंग | इष्टदेव | जप संख्या /1.सूर्य | माणिक | राम-विष्णु | 7000 (सात हजार)
2.चंद्रमा | मोती | शिव, पार्वती, कृष्ण | 11000 (ग्यारह हजार)
3.मंगल | प्रवालु | हनुमानजी, कार्तिकेय, नरसिंह | 10,000 (दस हजार)
4.बुध | पन्ना | गणेश, दुर्गा, भगवान बुध | 4000 (चार हजार)
5.बृहस्पति | पुखराज | विष्णु, ब्रह्माजी, वामनजी | 19,000 (उन्नीस हजार)
6.शुक्रग्रह| हीरो | परशुराम, लक्ष्मीजी | 16,000 (सोलह हजार)
7.शनि | नीलम | भैरवजी, यम, कूर्म, हनुमानजी | 23000 (तेईस हजार)
8.राहु | गोमेद | सरस्वती, शेषनाग | 18000 (हजार)
9.केतु | लहसुन | गणेश, मत्स्य | 17000 (हजार)
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